कोरियाई प्रायद्वीप पर उत्तर और दक्षिण कोरिया के संबंधों की वर्तमान स्थिति एक नए युग की भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का प्रतीक है। यह बदलाव वैश्विक स्तर पर अमेरिका-चीन के बीच बढ़ती प्रतिद्वंद्विता का नतीजा है। कूटनीति के कई असफल प्रयासों , खासकर 2019 के हनोई शिखर सम्मेलन के बाद , उत्तर कोरिया ने यह निष्कर्ष निकाला है कि अमेरिका के साथ संबंध सुधार उसकी सुरक्षा चिंताओं का हल नहीं है। इसके फलस्वरूप , प्योंगयांग ने अपनी संप्रभुता की रक्षा और बाहरी खतरों को रोकने के लिए अपनी परमाणु शक्ति को मजबूत किया है , जिससे उसकी स्थिति और प्रभाव कोरियाई प्रायद्वीप पर सुदृढ़ हो गया है। इस बदलते भू-राजनीतिक माहौल में , उत्तर कोरिया का नजरिया "नई शीत युद्ध" की व्यवस्था के अंतर्गत और भी सशक्त हुआ है , जहाँ अमेरिका , दक्षिण कोरिया और जापान एक ओर और रूस , चीन तथा उत्तर कोरिया दूसरी ओर गठबंधन के रूप में उभर रहे हैं। रूस और चीन जैसे प्रभावशाली राष्ट्र उत्तर कोरिया को प्रतिबंधों के आर्थिक दबाव से कुछ हद तक बचाने में सहायक हैं , लेकिन चीन के साथ इसके आंतरिक तनाव बने हुए हैं। चीन का पूर्वी एशिया में संतुलन ...
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