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रूस -उत्तर कोरिया के गहराते रिश्ते : मायने क्या हैं ?


(Photo Source: Herald) 

उत्तर कोरिया और रूस के बीच आर्थिक और सैन्य सहयोग  गहन होता जा रहा है। 

रूसी राष्ट्रपति पुतिन द्वारा  उत्तर कोरियाई विदेश मंत्री छवे सन-ही का गर्मजोशी भरा स्वागत रूस की ओर से दक्षिण कोरिया को चेतावनी के रूप में भी देखा जा है ।  

 रूस-ुयूक्रेन युद्ध में दक्षिण कोरिय यूक्रेन का समर्थन जरूर करता है लेकिन उसका निर्णय घातक हथियार भेजने का नहीं  रहा है। 

कोरिया के कई लोग मानते है कि  कोरिया गणराज्य-अमेरिका गठबंधन और रूस दोनों से  संतुलित कूटनीति का संचालन कर चाहिए क्योंकि आर्थिक दृष्टिकोण में अगर रूस का मार्किट चीन के पक्ष में गया तो वह हितकारी नहीं ।   इसलिए कोरिया को अमेरिका के साथ वार्ता कर अपने हितों का ध्यान रखना चाहिए और सुरक्षा की दृष्टि से भी उत्तर कोरिया के साथ बातचीत का रास्ता खुला रखना  चाहिए । 

इसका अर्थ यह कतई नहीं कि किसी भी प्रकार के परमाणु हमले  को बर्दाश्त किया जाए । 

रूस हालांकि उत्तर-दक्षिण में युद्ध होने कि सम्भवना या एकपक्षीय नीति से इंकार करता रहा है  और इस इरादे को सत्यापित करने के लिए उत्तर और दक्षिण  दोनों कोरिया से कूटनीतिक सम्बन्ध को परस्पर बनाये रखा है ।   लेकिन यूक्रेन युद्ध के वजह से ध्रुवीकरण फिर से गहराता जा रहा । 

गौरतलब है कि हाल के दिनों में उत्तर कोरिया द्वारा दक्षिण कोरिया के मुख्य शत्रु शासन को अपने संविधान में शामिल करने के अपने इरादे की घोषणा के साथ, रूस और अन्य शिविरों के साथ सहयोग को और मजबूत कर रहा । 

आज उत्तर कोरिया ने अपने विदेश मंत्री की रूस यात्रा की खबर जैसे ही साझा कि दक्षिण कोरिया के राजनीतिक और मीडिया महकमे को ब्रेकिंग न्यूज़ और त्वरित मुद्दा मिल गया । 

रूसी राष्ट्रपति पुतिन की यात्रा घोषणा की, कि वे कोरियाई प्रायद्वीप और पूर्वोत्तर एशिया सहित अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर संयुक्त कार्रवाई को बढ़ावा देने पर आम सहमति पर पहुंच गए हैं। और संवेदनशील क्षेत्रों सहित सभी क्षेत्रों में अपने संबंधों को और मजबूत करेंगे, यह व्यक्तव्य ' दक्षिण कोरियाई जनमानस में सरपट दौर रहा। 



राष्ट्रपति पुतीन ने  ''विकास'' की नीति की घोषणा में रूस द्वारा उल्लिखित 'संवेदनशील क्षेत्रों' की कोई विशेष व्याख्या नहीं थी, लेकिन दक्षिण कोरिया में ऐसा माना  जा रहा है कि  हथियारों के व्यापार जैसे सैन्य सहयोग भी  शामिल हो सकते हैं। 

गहन होता रूस-उत्तर कोरिया सहयोग पूर्वी एशिया में भूराजनीतिक परिदृश्य को बदल सकता है क्योंकि यदि रूस उत्तर कोरिया के लिए अधिक महत्वपूर्ण सहयोगी बनता  है  तो यह क्षेत्र में शक्ति संतुलन को प्रभावित करेगा और मौजूदा गठबंधनों को प्रभावित करेगा।

साथ ही साथ दोनों देशों के बीच संबंधों के गहराने से दक्षिण कोरिया और जापान के बीच सुरक्षा चिंताएँ बढ़ाता जायेगा । चीन परंपरागत रूप से उत्तर कोरिया का एक महत्वपूर्ण सहयोगी मानता है और रूस के बढ़ते प्रभाव से चीन की रणनीतिक गणना पर असर पड़ेगा I  संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय देशों सहित अंतर्राष्ट्रीय समुदाय संभवतः विकसित हो रहे रूस-उत्तर कोरिया संबंधों पर पैनी नज़र रख रहा।  यह विकास उत्तर कोरिया से संबंधित मुद्दों, जैसे परमाणु निरस्त्रीकरण, मानवाधिकार और क्षेत्रीय स्थिरता के समाधान के वैश्विक प्रयासों को प्रभावित करेगा लेकिन निकट भविष्य में बहुध्रुवीय कूटनीति, वैश्विक दक्षिण की आकांक्षा, रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व के मुद्दे पहले की तरह केंद्र में नहीं होंगे। 

मैंने कल अपने कांगवों नेशनल यूनिवर्सिटी द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रिय सेमिनार में सुरक्षा दुविधा  और पूर्व एशिया पर खासकर  गहरा प्रकाश डाला था और  कूटनीतिक तत्काल राजनयिक संलग्नता कि वकालत कि थी I पूर्वी एशियाई भू-राजनीति कुछ दशकों से निष्क्रिय रूप से सक्रिय थी, लेकिन रूस-उत्तर कोरिया का यह जुड़ाव भू-राजनीतिक कोणों और तनाव को फिर से सक्रिय कर सकता है।

डॉ संजय कुमार 

(जिला योंगसांन  दक्षिण कोरिया )


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